Sunday, 7 February 2021
Monday, 1 February 2021
Tuesday, 26 January 2021
Republic day
जन्म लिया इस मिट्टी में ,
ये मिट्टी नहीं,ये शान हमारी हैं
मातृभूमि इसको कहते ,
ये पहचान हमारी हैं
इस मिट्टी की बात भी हैं, कुछ निराली
यहां बहती गंगा, यमुना हमारी है
आंख उठती जब इसपर कोई
तो सबब ये उसको सिखाती हैं
ये मिट्टी नहीं, ये शान हमारी हैं
इस मिट्टी के रूप भी हैं, अनेक
कई रेत तो कई है हरियाली
इसे सींचा हैं जिन्होंने ,
वो बेटे इसके महान हैं
जान देकर भी जिन्होंने कि रखवाली इसकी हैं
जन्म मिला जब मुझको यहां
तब खुशी से गायी यहीं कव्वाली हैं
ये देश नहीं ये शान हमारी हैं
Friday, 1 January 2021
Thursday, 24 December 2020
Poetry
गुजरे वक्त की खाशियत हैं निराली
लौटता नहीं, मगर यादें होती हैं प्यारी
यूं तो भरोसा होता नहीं
पर शायद यही है तकदीर हमारी
परेशानी हैं गहरी
इतनी सी है हैं जिंदगानी हमारी
रूठो को हमे ही हैं मनाना
बस इतनी सी है परेशानी हमारी
भीड़ में भी अकेला करदे
ऐसी हैं तन्हाइयो से यारी हमारी
जुदा किसी से होना नहीं
इतनी सी है ख्वाहिश हमारी
Wednesday, 23 December 2020
Monday, 14 December 2020
a story began
Saturday, 12 December 2020
गुजरे वक्त की खाशियत हैं, निराली
गुजरे वक्त की खाशियत हैं निराली
लौटता नहीं, मगर यादें होती हैं प्यारी
यूं तो भरोसा होता नहीं
पर शायद यही है तकदीर हमारी
परेशानी हैं गहरी
इतनी सी है हैं जिंदगानी हमारी
रूठो को हमे ही हैं मनाना
बस इतनी सी है परेशानी हमारी
भीड़ में भी अकेला करदे
ऐसी हैं तन्हाइयो से यारी हमारी
जुदा किसी से होना नहीं
इतनी सी है ख्वाहिश हमारी
Tuesday, 24 November 2020
Thursday, 8 October 2020
hold on the expression of feelings
Saturday, 29 August 2020
शब्द भी कितने डरे होंगे
शब्द भी कितने डरे होंगे, सहम कर
तेरी लबो से लिपटे भी होंगे
जब तूने आखिरी सलाम भेजा होगा
मेरा सपना जब टूटा होगा
पलकों के मोती तो,
तेरे भी गिरे ही होंगे
मेरा सपना जब तूने तोड़ा होगा
तब ही सही मेरे नाम का सिमरन
तो बार बार तूने किया ही होगा
आँखों मे उफान,
और दिल मे कोहराम तो मचा होगा
जब तुने मेरा आखिरी खत जलाया होगा
मोहब्बत में यूं मिलना, बिछड़ना
तो शायद लाज़मी था
मगर दुख तब हुआ जब तुमने
हाल - ए-दिल को दस्तूर - ए-जहाँ
करार दिया
फिर भी सोचता हूं शायद
शायद एक बार तू भी रुका ही होगा
थम कर कुछ पल ठहरा भी होगा
दिल और दिमाग कि जंग मे
ज़ख्मी तू भी हुआ ही होगा
और तब यादों की दस्तक भी तेरे दर पर हुई होगी
पर शायद तब तक हवा का रुख मुड़ चुका होगा
# end of the story 🤐
शब्दों की बेबसी
Friday, 10 July 2020
Coffee lover
Love shayari
change
somethings have to change, but baby thst's not me.... cause u always says stuff that i don't believe so is it all on me.... i thoug...
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They were the happy family of four. but after a few failed attempt to kill the monster and saw their loved ones die their inner spirit was ...




